

MD-Junaid Khan
बिलासपुर। जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र ख़परगंज में हुए 28 अगस्त को दो पक्षों के बीच बलवा मारपीट पथराव आगज़नी के प्रकरण में अहम भूमिका निभाने वाला महीनों से फरार चल रहा मुख्य आरोपी राम सिंह को मध्यप्रदेश के ग्राम माकरी कुठार, थाना बृजपुर, जिला पन्ना से शनिवार को गिरफ्तार कर बिलासपुर लाया गया। जहां उसे न्यायलय में पेश कर जेल भेज दिया है। जानकारी के अनुसार रामसिंह ठाकुर घटना के बाद से पुलिस की तलाश में था। पुलिस ने उसकी संभावित मौजूदगी और संपर्कों के संबंध में जानकारी जुटाई। इसी क्रम में उसके मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के बृजपुर थाना क्षेत्र में होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस टीम ने ग्राम माकरी कुठार में दबिश दी, जहां रामसिंह अपने मित्र धीरेन्द्र पटेल के घर पर मिला। पुलिस ने उसे स्थानीय पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया।
सिटी कोतवाली क्षेत्र के ख़परगंज में 28 अगस्त को हुए दो पक्षों के बीच विवाद के बाद स्थिति बिगड़ गई थी। विवाद बढ़ने के बाद पथराव और तोड़फोड़ की स्थिति बनी, मामला सिटी कोतवाली के सामने तक पहुंच गया था और पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा था। घटना के दौरान पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई थीं।
थाना परिसर और आसपास खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचने के साथ ही आसपास के बाजार क्षेत्रों में भी तोड़फोड़ की स्थिति सामने आई थी। घटना के बाद आरोपी सोहेल खान ने 2 सितम्बर को कोनी थाना के सामने सरेंडर कर दिया था। वहीं दूसरा आरोपी राम सिंह फरार था।

रामसिंह ठाकुर अपराध क्रमांक 489/2026 में गिरफ्तार हुआ है, उसके गुट के राजू यादव उर्फ नान, राकेश यादव उर्फ रिंकु और छत्रपाल साहू को गिरफ्तार कर चुकी है। रामसिंह की गिरफ्तारी इसी प्रकरण में पुलिस की आगे की कार्यवाही का हिस्सा है। पुलिस अब उससे घटना के दौरान उसकी मौजूदगी और भूमिका से संबंधित तथ्यों की जानकारी जुटा रही है। पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस ने उपद्रव और हिंसा से जुड़े मामलों में 30 से अधिक लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया था।

पुलिस ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्तर पर कार्यवाही शुरू की। रामसिंह की गिरफ्तारी इसी जांच के दौरान हुई है। उसकी तलाश बिलासपुर से बाहर तक की जा रही थी और आखिरकार पुलिस टीम ने पन्ना जिले के माकरी कुठार में उसके ठिकाने तक पहुंचकर उसे गिरफ्तार किया। न्यायालय परिसर में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। गिरफ्तारी के बाद शनिवार को पुलिस बल की मौजूदगी में उसे न्यायालय में पेश किया गया। जहां से ज्यूडिशियल रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी राम सिंह को जेल लेकर पहुंची जेल दाखिल कराने के दौरान भी सुरक्षा के लिए जेल के आगे, पीछे और आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे।
कोर्ट में पेशी के बाद उसे बिलासपुर जेल भेजा गया, लेकिन शाम होते-होते खबर आई कि उसे बिलासपुर जेल से अंबिकापुर जेल ट्रांसफर कर दिया गया।

किसके संरक्षण में मिल रहा आरोपी को पनाह- सवाल यह है कि ? महीनों से फरार चल रहे आरोपी रामसिंह पुलिस को चुनौती देते हुए सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो डालता रहा। और जाति विशेष पर टिप्पणी एवं शहर के माहौल को बिगाड़ने का प्रयास करता रहा। फिर भी पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। एक पक्ष की तत्काल गिरफ्तारी होती है। एवं उनका जुलूस निकाला जाता है। वहीं दूसरे पक्ष के साथ हमदर्दी क्यों ? ना ही जुलूस न ही गिरफ्तारी।

बड़ा सवाल ?
29 दिन बाद गिरफ्तारी… कोर्ट जाते समय फूलों का स्वागत… और फिर कुछ ही घंटों में जेल बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
❓ बिलासपुर से अंबिकापुर भेजने का आधिकारिक कारण क्या है?
❓ जेल बदलने का फैसला किस स्तर पर लिया गया?
❓ क्या प्रशासन जनता को इसकी पूरी वजह बताएगा?
जवाबदेही कौन ?
29 दिन बाद गिरफ्तारी… अब असली सवाल!
29 दिनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा आरोपी आखिर कहां-कहां रहा? पुलिस तक उसकी लोकेशन क्यों नहीं पहुंच पाई? और अब जब गिरफ्तारी हो गई है, तो क्या पुलिस इस पूरे मामले में फरारी के दौरान उसे किसने पनाह दी और कैसे वह इतने दिनों तक पुलिस से बचा रहा—इन सवालों की भी जांच करेगी?
जवाब जांच और पुलिस कार्यवाही से सामने आना चाहिए।

