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रायपुर केन्द्रीय जेल में गैंगवार, यश शर्मा हत्याकांड के मुख्य गवाह पर जेल के अंदर जानलेवा हमला…जानिए पूरा मामला

जावेद खान की रिपोर्ट

रायपुर- केन्द्रीय जेल में गैंगवार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। केन्द्रीय जेल रायपुर एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। जेल के भीतर लगातार हो रही मारपीट, ब्लेडबाजी और सुपारी देकर हमले की घटनाओं ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। ताजा मामला बहुचर्चित यश शर्मा हत्याकांड से जुड़ा है, जिसमें इस केस के मुख्य गवाह पर जेल के अंदर जानलेवा हमला किया गया है।

जानकारी के अनुसार यश शर्मा हत्याकांड का प्रमुख गवाह कुशाल तोलानी हाल ही में प्रतिबंधित धाराओं के एक मामले में मात्र एक दिन के लिए न्यायिक अभिरक्षा में केन्द्रीय जेल रायपुर भेजा गया था। इसी दौरान जेल में पहले से बंद हत्याकांड के सभी चारों आरोपी जो आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं, उसी ने कथित तौर पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उस पर जानलेवा हमला करवाया।

पीड़ित का आरोप है कि एनडीपीएस एक्ट में सजा काट रहे एक कैदी के द्वारा तुषार पाहुजा, चिराग पंजवानी, तुषार पंजवानी और यश खेमानी ने कुशाल तोलानी पर चाकू से हमला करवाया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद जेल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। इस हमले ने यह साफ कर दिया है कि जेल के भीतर अपराधी बेखौफ होकर गैंगवार और सुपारी किलिंग जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

पीड़ित के मुताबिक जेल में बंद कुछ प्रभावशाली कैदियों द्वारा लगातार अन्य कैदियों को निशाना बनाया जा रहा है। ब्लेड, चाकू जैसे प्रतिबंधित हथियारों का जेल के अंदर पहुंचना भी सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। जेल में कैदी पर हमले की पहली वारदात नहीं है। इससे पहले भी जेल में मारपीट और गैंगवार की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

पीड़ित ने बताया कि जेल में इन चारों आरोपियों समेत कई प्रभावशाली कैदी मोबाइल का भी उपयोग कर जेल से धमकी, वसूली दे रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि इनके द्वारा जेल में हमले के बाद धमकी दी थी कि जब जेल में हम तेरे को इतना करवा सकते हैं तो बाहर तो तेरे को जान से मरवाना इससे भी आसान है। इस पूरे मामले को लेकर कुशाल तोलानी के परिजनों और अधिवक्ताओं ने कलेक्टर और एसएसपी रायपुर को लिखित शिकायत सौंपी है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जानबूझकर गवाह को जेल में भेजकर उसकी हत्या की साजिश रची गई और जेल प्रशासन इस हमले को रोकने में पूरी तरह विफल रहा। पीड़ित ने अपनी और परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है। मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में भी हलचल मच गई है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या केन्द्रीय जेल में कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित है, क्या गवाहों को पर्याप्त संरक्षण मिल पा रहा है।

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