CG CRIME

CIMS में जूनियर डॉक्टर को लैब टेक्नीशियन ने मारा थप्पड़ तो बढ़ा विवाद, हड़ताल पर बैठे नाराज डॉक्टर्स

मोहम्मद जावेद

बिलासपुर_ छत्तीसगढ़ के प्रमुख शासकीय मेडिकल संस्थान छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (CIMS), बिलासपुर में एक जूनियर डॉक्टर के साथ कथित बदसलूकी के बाद शनिवार सुबह से जूनियर डॉक्टर्स ने सामूहिक रूप से काम बंद कर दिया, जिससे अस्पताल प्रशासन की आंतरिक व्यवस्था और शिकायत निवारण प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। CIMS में आज यानी 20 दिसंबर को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब संस्थान में कार्यरत जूनियर डॉक्टर्स हड़ताल पर चले गए। मामला रेडियोलॉजी विभाग से जुड़ा है, जहां पदस्थ एक जूनियर डॉक्टर को लैब टेक्नीशियन मनीष कुमार सोनी ने थप्पड़ मार दिया। साथ ही मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।

जूनियर डॉक्टर्स के अनुसार रेडियो विभाग में ड्यूटी के दौरान लैब टेक्नीशियन मनीष कुमार सोनी ने एक जूनियर डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार करते हुए थप्पड़ मारा। घटना के बाद पीड़ित डॉक्टर और उनके सहयोगियों ने इसकी शिकायत संस्थान प्रबंधन से की। डॉक्टर्स का आरोप है कि शिकायत पर निष्पक्ष जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के बजाय प्रबंधन ने संबंधित लैब टेक्नीशियन को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताते हुए मामले को हल्का करने की कोशिश की। इससे जूनियर डॉक्टर्स में नाराज़गी और गहराती चली गई।

जूनियर डॉक्टर्स का कहना है कि CIMS की आधिकारिक व्यवस्था और नियमों के अनुसार, अस्पताल परिसर में किसी भी कर्मचारी या चिकित्सक के साथ दुर्व्यवहार को गंभीर कदाचार माना जाता है और ऐसे मामलों में आंतरिक जांच व अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद इस मामले में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से डॉक्टर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

हड़ताल पर बैठे जूनियर डॉक्टर्स ने आरोप लगाया कि प्रबंधन, दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय, उन्हें काम पर लौटने का दबाव बना रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच और स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे काम पर लौटने का निर्णय नहीं लेंगे। जूनियर डॉक्टर लैब टेक्नीशियन के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाए सिम्स प्रबंधन पर काम पर वापस लौटने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

ये हैं मांगें
•लैब टेक्नीशियन के खिलाफ निष्पक्ष जांच।
•दोष सिद्ध होने पर विभागीय कार्रवाई।
•अस्पताल में कार्यरत जूनियर डॉक्टर्स की सुरक्षा सुनिश्चित    करने के लिए स्पष्ट गाइडलाइन।
•भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त व्यवस्था।

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